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  • रेलवे सराहनीय समाजसेवा की डगर पर : मिलाएगा लापता बच्चों को परिवार से
  • March 08, 2015
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    नई दिल्ली। सरकार समाज के सरोकारों पर ईमानदारी से ध्यान दे तो वह सरकार कहलाने के योग्य होती है. कल्याणकारी सरकार की परिभाषा को चरितार्थ करते हुए महिला और बाल विकास मंत्रालय ने रेलवे परिसर में मिलने वाले घर से भागे और लापता बच्चों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ली है. रेल प्रशासन उनकी देखभाल करते हुए उन्हें आवश्यक भोजन, कपड़े और दवाएं भी उपलब्ध कराएगा.

    यहां गुरूवार ५ मार्च २०१५ को एसओपी अर्थात स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर की शुरुआत  केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी के हांथों की गई.. इसके माध्यम से रेलवे परिसर में मिलने वाले बच्चों की सुरक्षा की व्यवस्था और उनकी पर्याप्त देखभाल हो सकेगी. 

    दृढ़-निश्चयी कर्मयोगिनी मंत्री मेनका गांधी ने अपने वक्तव्य में कहा कि उनका मंत्रालय अब रेलवे के साथ मिलकर आधिकारिक रूप से इन बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. घर से दूर रेलवे को अपना बसेरा बना चुके इन मासूमों को वापस इनके परिवारों से मिलाने का अभियान आरम्भ किया जाएगा.

    मेनका गांधी ने आगे कहा कि ऐसे अनाथ बच्चे हज़ारों की संख्या में नहीं बल्कि लाखों में है. कम से कम तीन से पांच लाख बच्चे बेघर-बेदर भटकते हैं. फिर उसके बाद तो इन बच्चों की तस्करी हो जाती है या फिर ये घर छोड़कर आए बच्चे खो जाते हैं।

    रेल विभाग इन बच्चों को उनके घरवालों से मिलवाने के लिए यथा-आवश्यक कदम उठाएग. उनके लिए ऐसा संभव न कर पाने की स्थिति में उन बेघर बच्चों को शेल्टर होम्स में भेजने की भी रेलवे प्रबंधन की उत्तरदायित्व  होगी.

     

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