• देशभर से आए हज़ारों किसानों का संसद तक किसान मुक्ति मार्च,कर्जमाफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग
  • November 30, 2018
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    दिल्ली में जुटे  हज़ारों किसानों का मुक्ति मार्च और संसद  पर प्रदर्शन
     
    अंशुमान त्रिपाठी
     
    देश के विभिन्न राज्यों से अपनी मांगों को लेकर किसान मुक्ति मार्च में आए किसानों दिल्ली में संसद पर प्रदर्शन किया. रामलीला मैदान में जारी दो दिवसीय धरने में आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश आदि जगहों से किसान ट्रेन, ट्रैक्टर्स से पहुंचे हैं. किसानों की कर्ज मुक्त और फसल की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य दिए जाने की मांग को लेकर किसानों का दो दिवसीय आंदोलन जारी है.

    इस मौके पर बिजबासन से रामलीला मैदान तक निकाली गई रैली में आत्महत्या करने वाले किसानों की बेटियों ने अपने पिता की तस्वीरें लटका कर हिस्सा लिया. इस प्रदर्शन में मंदसौर में 2017 के दौरान किसान आंदोलन में हुई गोलीबारी में 6 किसानों की मौत को लेकर भी विरोध प्रदर्शन किया गया. 
    किसानों की इस मुक्ति यात्रा में पुरुषों के साथ महिला किसानों ने भी कंधे से कंधा मिला कर भागीदारी की है.
     इस बार की खास बात ये है कि किसानों के साथ डाक्टर, वकील, पूर्व सैनिक, पेशेवर और छात्रों सहित समाज के तमाम वर्गों के लोगों के समूह रामलीला मैदान में एकजुट हुए हैं.
     ऐतिहासिक रामलीला मैदान लाल टोपी और लाल झंडों  से पटा पड़ा था. इस मौके पर किसान ''अयोध्या नहीं, कर्ज माफी चाहिए'' जैसे नारे लगा रहे थे. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति बैनर तले दो सौ से ज्यादा किसान और सामाजिक संगठन औऱ कई राजनीतिक दल इस आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं.  किसान मुक्ति यात्रा की अगुआई सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और वरिष्ठ पत्रकार पी. साईंनाथ ने की. साईंनाथ की अगुआई में नेशन फॉर फॉर्मर्स के बैनर तले कई सामाजिक संगठन इस आंदोलन में हिस्सा ले रहे हैं.
     किसान आंदोलन को पूर्व सैनिकों ने भी समर्थन दिया और धरने में हिस्सा भी लिया. रामलीला मैदान में किसानों को अपना समर्थन देने के लिए देश के सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेता वहां मौजूद रहे. नेताओं ने किसानों की कर्जमाफी और किसान मुआवजे का मुद्दा उठाया. वहीं महाराष्ट्र के शेतकरी स्वाभिमानी किसान संगठन ने अपने नेता राजू शेट्टी के संसद में लाए किसानों के हित से जुड़े निजी विधेयकों को समर्थन देने की मांग की. इस बिल में उन्होंने  किसानों की तुरंत कर्जमाफी के अलावा स्वामीनाथन  आयोग की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य तुरंत लागू करने की मांग की. अखिल भारतीय किसान संघर्ष मोर्चा समन्वय समिति ने इस मौके पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग रखी.
    रामलीला मैदान में आयोजित सभा में शामिल किसानों ने अपनी तकलीफें बयान की. किसान कर्ज के दलदल में फंसता जा रहा है और उसके पास अपने हक की लड़ाई लड़ने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है. किसानों के मुताबिक अब खेती से लागत निकालना तक मुश्किल होता जा रहा है, खेती से जुड़े हर सामान का दाम दोगुना-तीन गुना होता जा रहा है लेकिन उसे अपनी मेहनत का दाम देने को कोई तैयार नहीं है. ज्यादा उत्पादन होना भी किसान की बदकिस्मती की निशानी बन गई है. मंडी में आधी कीमत तक नहीं मिलती और फसल को सुरक्षित रखने के लिए किसानों के पास भंडारण क्षमता नहीं है. खेत से खलिहान औऱ खलिहान से मंडी तक फसल का लाना-लेजाना भी खर्चीला सौदा हो चुका है. लेकिन आज की राजनीति उद्योग और पूंजीपरस्त हो चली है, मजदूर-किसान की उसकी नज़र में एक वोटर से ज्यादा कोई अहमियत नहीं है. उसे भी जाति-धर्म में बांट कर हासिल करना बहुत मुश्किल भी नहीं है.
     

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