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  • सिकलसेल एनीमिया के शिकार एक चौथाई आदिवासी बच्चे - रिपोर्ट
  • May 29, 2017
  • छह महीने पहले आलीराजपुर जिले में आदिवासी विभाग व स्वास्थ्य विभाग ने आदिवासी हॉस्टलआश्रम और स्कूली छात्रों के ब्लड सैंपल की जांच इंदौर की एक निजी लैब में करवाई थी। रिपोर्ट में 25 फीसदी बच्चे सिकलसेल एनिमिया से पीड़ित निकले। इस अनुवांशिक बीमारी में कई बच्चे तो एक ही परिवार के निकले हैं। यह जांच आलीराजपुर के तत्कालीन कलेक्टर शेखर वर्मा ने करवाई थी। इस रिपोर्ट की जानकारी स्वास्थ्य मंत्रालय को भी भेजी गई है लेकिन अब तक इससे निपटने के लिए व्यापक स्तर पर रणनीति नहीं बनी है। इस संबंध में अब तक कुल 4872 बच्चों की जांच हो चुकी है जिसमें छात्रावास व आश्रम के 3853, शेष अन्य बच्चे शामिल थे जिनमें से 1144 बच्चों में सिकलसेल एनिमिया से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है।

    सिकलसेल एनिमिया आदिवासी इलाकों में ज्यादा पाई जाती है। फिलहाल आलीराजपुर के आंकड़े सामने आए हैं। ये हालात धारझाबुआअनूपपुरशहडोल सहित कई जिलों में होने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा रणनीति बनाकर काम करने से बड़ी संख्या में बच्चों का भविष्य खराब होने से बचाया जा सकता है।

    सिकलसेल एनिमिया अनुवांशिक बीमारी है। इसमें लाल रक्त कणिकाओं में हीमोग्लोबिन वहन करने की क्षमता नहीं रहती जबकि हीमोग्लोबिन से ही फेफड़ों के जरिये आक्सीजनअंगों में पहुंचती है। ऑक्सीजन नहीं मिलने से बच्चों में थकानअंगों में दर्दबुखारकफसांस में तकलीफपीलिया सहित रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे खून का प्रवाह असामान्य हो जाता है। सिकलसेल एनिमिया से पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य कार्ड बनवाना जरूरी है जिससे परामर्श देकर युवक-युवतियों को विवाह से रोका जा सके और यह रोग अगली पीढ़ी में न पहुंचे। या फिर इनका उचित इलाज करवाकर बीमारी खत्म की जा सके।

     

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