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  • अरुणाचल में रह रहे एक लाख शरणार्थियों को मिलेगी नागरिकता - केन्द्र सरकार
  • May 22, 2017
  • केंद्र सरकार अरुणाचल प्रदेश में रह रहे करीब एक लाख चकमा और हजोंग शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने जा रही है। इससे उनको इनर लाइन परमिट जारी होगे जिससे  वे राज्य में कहीं भी आ-जा सकेंगे और अपनी आजीविका चला सकेंगे।

    संविधान में तहत किसी को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार केंद्र सरकार को है। इसी का इस्तेमाल करते राज्य सरकार की आपत्ति के बावजूद केंद्रीय गृह मंत्रालय इन शरणार्थियों को नागरिकता दे सकता है। हालांकि सामान्य प्रक्रिया के तहत पहले हम इस मुद्दे पर राज्य सरकार को सहमत करने की कोशिश करेंगेइसीलिए उसके साथ चर्चा शुरू की गई है। हालांकि सूत्र बताते हैं कि चकमा और हजोंग शरणार्थियों को नागरिकता भले मिल जाएलेकिन उन्हें अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा। साथ ही उन्हें राज्य में जमीन का मालिकाना हक भी नहीं मिल पाएगा। उनको इनर लाइन परमिट जारी किए जाएंगेजिसकी मदद से वे राज्य में कहीं भी आ-जा सकेंगे। अपनी आजीविका चलाने के लिए काम कर सकेंगे।

    गौरतलब है कि 1960 के दशक में बांग्लादेश (उस वक्त पूर्वी पाकिस्तान) में कप्ताई बांध परियोजना की वजह से हजारों की तादाद में चकमा और हजोंग समुदाय के लोग विस्थापित हुए थे। चकमा बौद्ध धर्म से ताल्लुक रखते हैं और हजोंग हिंदू समुदाय सेइसलिए उस वक्त तत्कालीन पाकिस्तान सरकार ने इनके पुनर्वास में रुचि नहीं दिखाई। इसलिए इन्हें भारत में शरण लेनी पड़ीतब से ये बिना नागरिकता के रह रहे हैं।

    सूत्र बताते हैं कि शुरू में करीब 5,000 चकमा और हजोंग शरणार्थी ही अरुणाचल प्रदेश में आकर बसे थेलेकिन अब इनकी तादाद लाख को पार कर चुकी है। इन्हें नागरिकता देने के खिलाफ राज्य सरकार की दलील है कि इससे प्रदेश में रह रहा जनजातीय समुदाय अल्पसंख्यक हो जाएगा। उसके लिए अवसरों की कमी हो जाएगी। वहींऑल असम स्टूडेंट यूनियन (आप्सू) तो इन्हें राज्य से बाहर निकाल देने की मांग करता रहा है।

     

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