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  • कोरोना अगर महाभारत है तो कौन है अर्जुन, और कहां है उसका सारथी...घरों में क्यो छिपे हैं सभी महारथी..
  • April 01, 2020
  •          प्रधानमंत्रीजी को  जनता के हर नुकसान से मुनाफा कमाने की सियासत में महारत हासिल है

                     कोरोना अगर महाभारत है तो कौन है अर्जुन, और कहां है उसका सारथी...घरों में क्यो छिपे हैं सभी महारथी..
      प्रधानमंत्रीजी, आप सचमुच महानायक हैं. आपकी महानता है कि आप जनता के हर दुखदायी पहलू से भी निजी और पार्टी के स्तर पर मुनाफा कमाना जानते हैं. जनता की हर तकलीफ को जलसे की तरह मनाना आपका पुराना शगल है. फिर उस जलसे में सेहरा पहन कर बैठ जाना आपकी फितरत. अपने आपसे औऱ अपने मुनाफे से आपका प्रेम बहुत पहले से ही साफ नज़र आता है. जनता की तकलीफ के वक्त भी फायदा लेने की ये आदत ही आज पूरे देश के लिए तकलीफदेह बन गई हैं. कोरोना संक्रमण के दौर में भी आप अपने प्रमोशन औऱ मार्केटिंग का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. यहां तक तो ठीक है लेकिन इसके साथ ही माली मुनाफे का खेल भी खेला जा रहा है. लेकिन आप योगासन करते हुए खुद को कृष्णावतार साबित करने में लगे हुए हैं..
     
      देश में कोरोना से महाभारत जारी है.... पत्रकारिता आपकी स्मृतियों के साथ अंताक्षरी खेल रही है, स्वास्थ्यमंत्री लूडो खेलने लगे हैं अपनी पत्नी के साथ, ग्रहमंत्री अपने गृह में ही बंद हो गए हैं, और तो और रक्षामंत्री अपने घर से ही देश की रक्षा सम्हालने में जुटे हुए हैं, तो जाहिर है कि आप लोगों को जनता से ज्यादा अपनी जान की फिक्र है.
     
    यहां तक तो ठीक है, जान बचाना आपका अपना हक है, इसे छीना नहीं जाना चाहिए, लेकिन जब पूरा जहान अपनी जान पर खेल कर जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा हो, वहां भी आपके कदमों से मुनाफाखोरों का फायदा हो रहा है तो ये आपकी नादानी तो कतई नहीं हो सकती. आपके तो खून में व्यौपार है. आपसे बेहतर ये कौन जानता है कि जब जनता परेशान होती है तो व्यौपारी कैसे दो के चार कमाता है. और इसीके लिए आपकी जैसी सियासी पार्टी को चंदा भी देता है राष्ट्रवाद औऱ देशप्रेम के बहाने. इस वक्त आंक़डें देने की ज़रूरत नहीं, लेकिन हर कोई समझ रहा है कि दवा, राशन, सेनटाइज़र, मास्क वगैरह को लेकर किस तरह जमाखोरी हो रही है औऱ मुनाफाखोरी हो रही है. लेकिन आप बेहद भोले हैं, नादां है, ऐसा तो हो नहीं सकता. सब कुछ आपकी नाक के नीचे हो रहा है. असल बात तो ये है कि इस वक्त मुनाफाखोर बगैर सरकार और किसी सियासी पार्टी के शह के ये काम करने की हिमाकत नहीं कर सकते.
     
    लॉकडॉउन बढने की अफवाह फैलने से इन मुनाफाखोरों की बांछे और खिल गईं, क्योंकि अफवाहें पहले की भी सही निकली, जनता कर्फ्यू से ही इन्हें इशारा मिल चुका था, अपेरल की पहली तारीख यानि अगले 24 घंटों में बाज़ार से सामान गायब हो चुका होगा, लोग त्राहि-त्राहि कर रहे होंगे और मीडिया मास्टर स्ट्रोक-मास्टर स्ट्रोक.
     
    कोरोना संक्रमण से पलायन औऱ मौतों की तकलीफ से भी बढ़ कर तकलीफदेह बात ये है कि आप सबकुछ जानकर भी एक परमयोगी का भाव ओढ़ लेते हैं. बिल्कुल वैसे ही जैसे आम चुनाव के दौरान हिंदू-मुसलमान कर के देश भर में घृणा औऱ बैर भाव भर दिया था औऱ फिर भगवा लपेट के केदारनाथ की गुफा में बैठ गए थे. प्रेम के देवता के सामने घृणा का अवतार बन कर पूरी बेशर्मी के साथ. भगवा रंग का इतना कुत्सित प्रयोग हिंदू धर्म ने कभी नहीं देखा. ये बिल्कुल उसी तरह हो रहा है जैसे विदेशी आक्रांता हज़ारों सालों तक देश पर हमले के लिए इस्लाम का चोला इस्तेमाल करते रहे. आज वोटों पर डाका डालने के लिए भगवा प्रयोग हो रहा है.
     
    कोरोना संक्रमण के दौर में भी आत्ममोह से ग्रस्त राजनीति करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं आप. जब आपको अपने साथियों समेत सुरक्षा मुखौटे, दस्तानों के साथ सड़क पर होना चाहिए था. आप सब सत्ता का परम सुख भोग रहे हैं. जो विवाहित हैं वो दांपत्य की दुहाई दे रहे हैं, तो आप जैसे भी हैं जो योग की दीक्षा में जुट गए हैं. इतने भोले तो नहीं हैं आप, जितना मोहनी स्वरूप मीडिया में दिखा रहे हैं.
     
    यहां तो आपको योगावतार श्रीकृष्ण का रूप दिखाना चाहिए था. महाभारत है तो अर्जुन के रथ का सारथी  बन कुरुक्षेत्र में उतरना चाहिए था. लेकिन क्या करें छलिया रूप धर कर व्यौपार करने से कोई कृष्णावतार नहीं हो जाता प्रधानमंत्री जी...
     
    क्या है आपकी रणनीति, कहां था आपका प्लान, वो सूझ-बूझ जिसके आप खुद कायल हैं और अपने पर ही मोहित हैं, जिसका सूझ-बूझ का हवाला आप संसद में भी देते रहे हैं. लाखों की तादाद में अपने बंधु-बांधवों को राष्ट्रीय राजमार्ग पर अपने दुधमुंहें बच्चों के साथ भूख मिटाने की आस में भूखे पेट सैकड़ों मील दूर अपने घरों की तलाश में जाने को मजबूर किया आपने. वो सूझ-बूझ आपके पास है, बेशक है, लेकिन पार्टीफंडरों के मुनाफे ने आपके हाथ बांध रखे हैं. ऐसे में योगमुद्रा का नाटक मीडिया में दिखाया जा रहा है....
     
    और खुद..खुद एक पैर उठा कर अपना शारीरिक सौष्ठव पता नहीं किसको दिखाने पर आमादा हैं आप...
     
    वोटों के कुशल व्यौपारी हैं आप... पहले से ही प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष है...लेकिन नहीं, ऐसी व्यवस्था हो जिस पर किसी व्यवस्था का नियंत्रण ना हो...पीएम केयर फंड ना हो गया राफेल की डील हो गई....मैं चाहे इसको दूं, मैं चाहे उसको दूं, मेरी मर्ज़ी....
     
        रूस को एक अरब डॉलर की इमदाद देने वाले यहां की गरीब जनता पर भावनात्मक दबाव डाल कर उनकी खून-पसीने की कमाई को ऐसे कोष में डलवा रहे हैं, जिसका रूप-स्वरूप किसी को ढंग से बताया नहीं गया.
     
    आपको याद होगा प्रधानमंत्री बनते ही जिस बड़े जलसे के साथ आपने स्किल डेवलपमेंट की योजना का ऐलान किया था, उस जलसे के आयोजक ने लोगों से हज़ारों करोड़ रुपए वसूले थे. लेकिन अपने स्वयंसेवी के हित के लिए आपने इतने बड़े घोटाले को दबा दिया.
     
    यही नहीं,चुनाव से पहले आपने पंद्रह-पंद्रह लाख दे कर कंगालों को धनवान बनाने का वादा किया था. लेकिन हुआ सका उल्टा.  नोटबंदी के दौरान प्रमुख विपक्षी पार्टी तो माली रूप से नंगी हो गई, और कुछ गली-मोहल्ले के पक्के मकान वाले. लेकिन आपकी सरकार और पार्टी से जुड़े नेता और दलालों की जिस तरह से पौ-बारह हुई, वो सभी जानते हैं. विपक्ष के लिए नोटबंदी तो सत्तारूढ़ पार्टी के लिए नोटबदली का जश्न... जिसको जितना चाहिए लूट-लूट ले जाए... लड़ाई आपकी विपक्ष से और पिस गई बेचारी गरीब जनता..बिचारी इसी गफलत में रही कि  सब धनवान कंगाल हो जाएंगे. 
     
    बहुत बड़े छलिया हैं आप, यही तरकीब डिजिटल इंडिया बनाने की थी. एक बड़े व्यौपारी घराने ने देश ही नहीं पूरे एशिया में मोटे-मोटे फाइबर केबल बिछाए समंदर के भीतर औऱ जमीन के ऊपर, कई सौ सालों तक मुनाफाखोरी के लिए. सो उन्होंने सरकार बदलने के लिए मुंहमांगे दाम दिए. आप भी ब्रांड एबेस्डर बन गए. जिस देश के सत्तर फीसदी ग्रामीण इलाकों में ढंग से एटीएम भी नहीं लगे हों, वहां के लोगों के लिए भी आपने डिजिटल ट्रांसेक्शन मजबूरी बना दिया. बैंडविड्थ की बिकवाली बढ़ाने के लिए देश के सबसे बड़े ओहदेदार का व्यौपारिक इस्तेमाल पहले कभी नहीं हुआ था. एक बार इन्ही सेठ के बाबूजी ने किया था लेकिन ढंके-मुंदे. डिजिटल के नाम पर कई तरह की जालसाजियां हुईं और हो रही हैं लेकिन पुलिस के पास साइबर क्राइम रोकने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं. 
     
    यही काम बैकिंग सेवाओं के लिए किया गया. अगर आंकड़े देखें जाए तो 2014 से अब तक बैंकों का एनपीए जितना बढ़ा है उतना काम पिछले साठ सालों में नहीं हो पाया. मोदी है तो मुमकिन है. ऊपर से बैंकों से ट्रांजेक्शन की दरें बढ़ा दी गईं, नई नई मदों में कटौतियां शुरू कर दी गईं. उनके पास पैसा रखा है तो वो चाहे जितना काटें, आम आदमी के पास एक दो बार शिकायत करके ठंडे पड़ जाने के सिवा चारा क्या है. यही नहीं, मुद्रा योजना के तहत किनको कर्ज मिला, ये आम जनता को अब तक पता नहीं नहीं चला. ये सिर्फ उस पार्टी को पता है जिसके पास करोड़ से ऊपर कार्यकर्ता है. उस पार्टी को पता है जिस पर करोड़ों कार्यकर्ताओं के सुख-दुख, रख-रखाव के खर्चे का जिम्मा है.
     
    दुश्मनों के दुश्मन और दोस्तों के दोस्त ने ना जाने कितने माल्याओं को माला पहना कर विदेश भेज दिया.जाने कितने मोदी नीरवता में आनंद ले रहे हैं. मीडिया ने भी खूब झांसा दिया. मोदी जी के कानून से लंबे हाथ अब उन्हें दबोच कर वापस लाने ही वाले हैं. बड़े पैमाने पर कर्जमाफी हुई. वहीं कर्ज की वजह से हज़ारों किसानों ने फांसी पर लटक कर जान दे दी. बहुत से दिल्ली तक आए. निर्वस्त्र हो कर अपनी पेशाब पी कर अपने किसान होने की भर्त्सना कर चले गए लेकिन आपका दिल नहीं पसीज़ा.
     
    लेकिन आप नटवर है प्रभु, आपकी लीला अपरंपार, महज़ दो –दो हज़ार की दो किस्तों में इन भोले किसानों को फिर मोह लिया. सब भूल गए आपकी रासलीला. औप सोलह कलाओं के साथ फिर सत्ता में अवतरित हो गए.
     
    आप हर अवसर-हर हुंडी को दोगुने दाम पर भुनाने में माहिर हो. आपकी अभिनय क्षमता आपको देश के हर राजनीतिज्ञ से अलग खड़ा करती है. आप कोरोना से लड़ने के लिए करुणा का हथियार इस्तेमाल करना जानते हैं. भोली जनता करुणा भाव में आपके विराट स्वरूप को नहीं देख पाती महाप्रभु. सही भी है, आपको सिर्फ जनता ही नहीं अखिल विश्व और चराचर जगत के मुनाफे का खयाल रखना है.
     
    आपके भक्तों को इस बात की बड़ी पीड़ा है कि #Corona भेदभाव क्यों नहीं करता, #हिंदू-मुस्लिम क्यों नहीं करता. दुनिया का इतिहास बदल देने वाली इस घटना से कोई राजनीतिक फायदा ना लिया जा सके, ऐसा नहीं हो सकता. लिहाज़ा आपके #मीडिया_वायरस तलाश में जुटे हुए हैं औऱ उन्हें  # TablighiJamaat ढूंढ़ ली गई है. आनंद विहार तक मजदूरों को ला कर छोड़ देने के आरोप के साथ आपको औऱ आपके घृणा-प्रचारकों को एक नहीं दो-दो खलनायक मिल गए हैं.# तबलीगी_शैतान_केजरी_हैवान का नारा सोशल मीडिया पर गूंजने लगा है.  अब चीन और वुहान की जगह तबलीगी शैतान के नारे ने ले ली है. कोशिश तो ये की जा रही है कि इन हालात के लिए # CoronaJihaad का हव्वा खड़ा किया जा रहा है.
     
    नटराज अब ये तांडव बंद कर दीजिए,घृणा औऱ तिरस्कार तज कर प्रेम औऱ मानवता को बख्श दीजिए...वरना लोग तो क्या इतिहास भी आपको कभी माफ नहीं कर पाएगा

     

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