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  • आपको दिल से कभी माफ नहीं कर पाएंगे देश के गरीब और मजदूर, प्रधानमंत्रीजी !!
  • March 30, 2020
  •  आपको कोई दिल से माफ नहीं कर पाएगा प्रधानमंत्रीजी...सड़कों पर भटक रहे लाखों लोग बदद्आएं दे रहे हैं....

    ये गलत बात है कि आपके पास कोई चारा नहीं था. आप जब चाहते हैं तब आगा-पीछा सोच कर मुस्तैदी से फैसले लेते हैं. और आप जब चाहते हैं तब जानबूझ कर फैसले लेने में ढिलाई बरतते हैं औऱ कंफ्यूज़न का माहौल बनाए रखते हैं. जम्मू-कश्मीर,धारा 370, तीन तलाक, बालाकोट, रिजर्व कैपिटल फंड के इस्तेमाल संबंधी फैसले आननफानन लिए फैसले नहीं हैं.इनकी अंदर ही अंदर पूरी तैयारी रखी गई. वहीं नोटबंदी, जीएसटी, और लॉकडॉउन में जो एक कदम आगे, दो कदम पीछे वाली हीलाहवाली के हालात आपने अनचाहे नहीं बल्कि जानबूझ कर बनाए हैं. आपको फैसलों में आपकी राजनीतिक लिप्सा की छाप मिलती है.

    आप हमेशा की तरह इस बार भी भावुकता का मुखौटा पहन कर अमीरों के फायदे की लड़ाई में जुटे हुए हैं. हैरानी है कि आपके पास कोई चारा नहीं था, कहते हुए आपको शर्म नहीं आई. सच्चाई तो ये है कि आपने जानबूझ कर ढिलाई बरती औऱ सियासी जरूरत पर चौंकाने वाली मुस्तैदी भी दिखाई. एक इंसान हो कर भी आपको ये अंदाज़ा नहीं था कि गरीब, मजदूर लॉकडॉउन के हालात में कैसे पेट भरेंगे, कहां जाएंगे, ये चौंकाने वाली बात है.

    आपको डर लगा क्योंकि कोरोना आपकी तरह हिंदू-मुसलमान नहीं कर रहा. ना ही आपकी तरह गरीब का नाम लेकर अमीरों के लिए काम कर रहा है. आपकी बांटो और राज करो की राजनीति को कोरोना संक्रमण ने नंगा कर दिया है. अभ लोगों को ये भी पता चल चुका है कि आफ गरीब का मुखौटा लगा कर पूंजीपतियों के हित की आर्थिक नीतियां लागू करते हैं.

    आपके फैसले चौंकान वाले होते हैं. आपने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों और उनके राजनीतिक दलों की जेब खाली करने के लिहाज़ से नोटबंदी की थी. साथ ही अपने शत्रुओं को पहचान कर उन्हें नोटबदली करने से रोकने के लिए हर कड़े कदम उठाए थे. वहीं अपने दल से जुड़े लोगों का नोटबदली नेटवर्क खुल कर काम करत रहा. इस मामले में मध्यम वर्ग कंगाल हो गया, लेकिन निम्न वर्ग को दूसरों की कंगाली पर हंसना आपने सिखाया. खुद मिमिक्री कर के आपने परपीड़क हंसी वाली शैली में बताया कि जब हमने 8 बजे ऐलान किया तो लोगों की क्या स्थिति हुई. ताज्जुब की बात है कि इतने बड़े पद पर बैठा व्यक्ति आम लोगों की तकलीफ पर ऐसे कैसे हंस सकता है. लेकिन आपका बाल-बांका ना हुआ क्योंकि आपने मध्य वर्ग और निम्न वर्ग के बीच बैर भाव को ही हथियार बनाया.ये अलग बात है कि बाद में सूक्ष्म,मध्य़म औऱ लघु उद्योगों में तालेबंदी से लाखों-कोरोड़ों मजदूर सड़कों पर आ गए. उस वक्त भी उन्हें जिंदा रहने के लिए अपने उसी घर-गांव लौटना पड़ा, जहां से वो कुछ बेहतर जिंदगी की तलाश में शहर आए थे. लेकिन आपके पास पठानकोट था. आपके पास राष्ट्रवाद था. पाकिस्तान बेजुबान जानवर की तरह था लेकिन आप उस पर गरज गरज कर लोगों में देशभक्ति का उन्माद भरते रहे. पुलवामा का सच आज तक आपने आने नहीं दिया. देश की मासूम जनता को एक बार फिर आपने धोखा दिया.

    यही काम आपने जीएसटी लागू करने के वक्त किया. जीएसटीलागू करने के वक्त आधी रात को उसी तरह संसद में जश्न मनाया गया जैसा स्वतंत्रता प्राप्ति के वक्त मनाया गया था. जवाहर लाल नेहरू ना होने पाने को लेकर इतनी कुंठा से क्या मिला. देश आर्थिक मंदी का ऐसा शिकार हुआ कि आपने आंकड़े छिपाने शुरू कर दिए. कई आर्थिक विशेषज्ञ और एक नहीं, दो-दो रिजर्व बैंक गर्वनर इस्तीफा दे कर चले गए. देश में एमएसएमई सेक्टर की दुर्दशा और असंगठित क्षेत्र की बेरोज़गारी आपके इसी फैसले की देन है. आपने हर साल दो करोड़ नौकरी का वादा किया लेकिन सच्चाई ठीक इशके उलट रही. हर साल लोगों ने एक करोड़ नौकरियां गंवाईं. लेकिन आपका हार्ड वर्क वाला गुरूर और बढ़ गया. ये भी आपकी कुंठा का नतीज़ा था. आपने जनता पर एक नहीं निजी कुंठाओं से भरे कई फैसले थोपे और ऊपर से राष्ट्रवाद, महान हिंदू धर्म,देश प्रेम वगैरह का मुलम्मा चढ़ा दिया. विरोध को दबाने के लिए मीडिया हॉउसेज़ खरीद लिए गए. बड़े मीडिया समूहों ने प्रादेशिक संस्करण शुरू कर केंद्र से सरकारी इमदाद लेना भी शुरू कर दिया. आपने हर जगह पिरामिड पर खुल कर ताली और थाली बजाने वाले बिठाए. बदले में मालिकों को माली मदद से मालामाल करने का भरोसा दिया. पीएमओ से देश का मीडिया चलने लगा. सोशल मीडिया के न्यूज़ ऑउटलेट्स में हर सुबह कम से कम दो-तीन हेडलाइन्स तय की जाने लगी.

     हमें याद है आप कहा करते थे कि अगर देश के मीडिया से तालमेल कर लिया जाए तो मुल्क पर कोई भी पचास साल तक शासन कर सकता है. हालांकि ये बात कांग्रेस के परिप्रेक्ष्य में कहते थे लेकिन आपने कांग्रेस से बेहतर तरीके से इसे लागू किया. इसी मीडिया ने ही 2019 में प्रशांत कशोर की जरूरत खत्म कर दी. पूरा चुनाव टीना पैक्टर पर लड़ा गया. ये मानते हुए कि आप नाकाबिल हैं, प्रचार यही किया गया कि दूसरा भी कोई काबिल नहीं है. आप अब तक यही बेच रहे हैं प्रधानमंत्रीजी, आज भी आप यही कहते हैं कि कोई चारा ना था. आप ये छुपाते हैं कि आपके पसंदीदा कॉर्पोरेट के हित के लिए आप किसी भी हद तक जा सकते हैं.

    ऐसा नहीं है कि आप मुस्तैदी से फैसले नहीं लेते. आपके फैसले जनता पर तमाचे की तरह होते हैं. भारतीय रिजर्व बैंक से लड़ लड़ कर एक लाख छियत्तर हज़ार करोड़ रुपए पर खुले आम डाका डाला गया. गवर्नरों के बार बार विरोध के बाद भी. पूरे देश को लगा कि अऱ्थ व्यवस्था को सम्हा4लने के लिए ये पैसा उपभोक्ता के हित में खर्च किया जाएगा ताकि बाजार में मांग बढ़ सके और उससे प्रधानमंत्री के मित्रों की कंपनियों का सामान बिक सके. लेकिन आपकी निजी निष्ठा ने तब भी मानवता को शर्मसार कर दिया था. आपने वो पैसा सीधे बड़े बड़े कॉर्पोरेट्स के हाथों में तमाम छूट के नाम पर सौंप दिया. पूरा देश स्तब्ध, बेबस देखता रह गया प्रधानमंत्रीजी.

    बाद में आपने सार्वजनिक उपक्रमों की खुली बोलियां लगानी शुरू कर दी. रेल्वे से लेकर विमान प्राधिकरण, प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम कंपनियां, सरकारी टेलीकॉम कंपनियां औने-पौने में आपके यार खरीदने के लिए आपके यहां लाइन लगाने लगे. आप भी कुछ हज़ार करोड़ के खर्च के हवाले से लाखों करोड़ की कंपनियां मुगल बादशाहों की तरह लुटाने लगे. विदेश गए तो अपने से बड़ी माली हैसियत वाले देशों को भी इमदाद दे कर अपनी बादशाहत का अहसास कराने से नहीं चूके. दिल्ली के कनाट प्लेस वाले हनुमानजी को प्रसाद चढ़ाने वालों की तरह आपने कभी गरीब मोहल्ले के संकटमोचक को ना ही पूजा ना ही खुद बनने की कोशिश की.

    फैसले लेने में आपकी मुस्तैदी  एक नही, कई मिसाल हैं. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने में भी आपका फैसला चौंकाने वाला था. इस फासले को लागू करने की आपने पूरी तैयारी कर ली थी. पंद्रह दिन से वहां सैनिक-प्रशासनिक कबायद जारी थी. लेकिन किसी को ये इल्म नहीं था कि इतना बड़ा फैसला कभी लिया जा सकता है. आपने दो करोड़ लोगों को लॉकडॉउन में रखा सात महीने तक. आज भी सीमित इंटरनेट सेवा ही बहाल हो पाई है. आपने जम्मू-कश्मीर पर एक तरह से फतह हासिल की है क्योंकि आपको लगता है कि आपके फैसले से वहां की मेजॉरिटी प़ॉपुलेशन सहमत नहीं है. लेकिन उन पर फतह से देश की हिंदू जनता को परपीड़ा का सुख दे सकते थे. आप जानते हैं कि वहां बीजेपी को भले ही कुछ ना हासिल हो लेकिन इस फैसले से आप ज्यादातर हिंदुओं को कई साल तक एकजुट कर सकते हैं. क्योंकि उनमें इस बात को लेकर एक खास किस्म की कुंठा का प्रचार किया गया है कि इस राज्य को विशेष दर्जा इसलिए मिला हुआ है क्योंकि ये राज्य मुस्लिम बहुल राज्य है. आपकी पार्टी और संगठनों ने इश बात का पिछले सत्तर सालों से यही प्रचार किया कि वहां हिंदुस्तानी सरकार के बजाय इस्लामी कायदा-कानून चलता है.  

    मोदीजी, आपको मुस्लिम कट्टरपंथियों की तरह हिंदुओं में कट्टरपंथ की राजनीति को स्थाई बना दिया. देश के हिंदुओं को इस बात का गर्व रहता था कि वो किसी भी प्रगतिशील धर्म से ज्यादा प्रगतिशील हैं. लेकिन आपने पुनरुत्थानवादी धारणाओं, धर्म और ध्वजा को देश की राजनीति के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया.

     ऐसे में आपको भेदभाव ना करने वाली बीमारी कतई रास नहीं आ रही है. आप समझ नहीं पा रहे हैं कि ऐसे में हिंदू वोटों को एकजुट करने के लिए क्या कदम उठाए जाएं. और वो कौन से कदम उठाए जाएं जिससे आप अपने कॉर्पोरेट मित्रों का कुछ आर आर्थिक मदद कर सकें. क्योंकि प्रकृति ने ये संदेश दे दिया है कि उसके लिए सब बराबर हैं. ना कोई अमीर, ना कोई गरीब. ना कोई हिंदू, ना कोई मुसलमान. लेकिन आपकी प्राथमिकता साफ नज़र आ रही है. कम से कम आपकी प्राथमिकता गरीबों को बचाने की कतई नहीं है. बल्कि उनके प्राणों की एवज में आप कोरोना से लड़ने का ढोंग कर रहे हैं. अब माफी मांगने की नौटंकी बंद कर दीजिए, क्योंकि आपको माफ करना इंसानियत के साथ धोखा होगा.

     
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