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  • पर्यावरण और प्रकृति प्रेम पर ही आधारित है हमारी भारतीय संस्कृति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ग्रेटर नोएडा में मरुस्थलीकरण और पर्यावरण पर दुष्प्रभावों को लेकर विचार-मंथन कर रहे हैं 13 देशों के प
  • September 09, 2019
  •  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि भारत में सदा से धरती को पवित्र स्थान दिया गया है।  भारतीय संस्कृति में भूमि को माता माना गया है। भारत के लोग सुबह सोकर उठने के बाद धरती को नमन करके दिन की शुरुआत करते हैं। भारत के लोग प्रात:काल धरती पर पैर रखने से पहले 'समुद्र वसने देवी पर्वतस्तलन मंडले, विष्णुर पत्नी  नमस्तुभ्यम्, पाद स्पर्श क्षमस्वसमे' की प्रार्थना करते हैं। प्रधानमंत्री ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में चल रहे 12 दिवसीय कॉप -14 (Conference of Parties) कॉन्फ्रें स की बैठक संबोधित कर रहे थे. उन्होंने अपने संबोधन में जलवायु परिवर्तन, बढ़ते मरुस्थलीकरण, गंभीर जल संकट, जैव-विविधता,जलवायु परिवर्तन से लेकर प्लास्टिक के प्रयोग से पर्यावरण पर बढ़ रहे दुष्प्रभावों पर चिंता जताई. उन्होने सम्मेलन मे शिरकत कर रहे देशों को जलवायु परिवर्तन के गंभीर खतरे से आगाह कराते हुए कहा कि कि पर्यावरण और जलवायु, जैव विविधता एवं धरती दोनों को ही प्रभावित करते हैं।इन दिनों  दुनिया जलवायु परिवर्तन के गंभीर दुष्प्रभावों का सामना कर रही है। ये दुष्परिणाम भूमि के क्षरण के रूप में दिखाई दे रहा है। यही नहीं इससे जीवों की प्रजातियों पर भी संकट मंडराने लगा है। हम इन दुष्परिणामों को धरती का तापमान बढ़ने, समुद्र का जलस्तलर बढ़ने और बाढ़, तूफान, भूस्खलन जैसी घटनाओं के तौर पर देख रहे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी की दुनिया के दो तिहाई देश मरूस्थलीकरण जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। सबसे अहम बात ये है कि प्रधानमंत्री ने सम्मेलन में भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण की अहमियत बताई. 

     
    संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (United Nations Convention to Combat Desertification, UNCCD) के तहत आयोजित ये 14 वां सम्मेलन भारत ने आयोजित किय़ा है। भारत में पहली बार बड़े स्तर पर यह कार्यक्रम हो रहा है। मौजूदा वक्त में भारत संयुक्त राष्ट्र की भूक्षरण के खिलाफ चल रहे अभियान का प्रमुख है। इस समारोह में 130 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. भारत को साल 2020 तक इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले चीन इस सम्मेलन की अध्यक्षता करता रहा है। साल 2017 में भी चीन ने ही इस कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसका कार्यक्रम का आयोजन दुनिया को बढ़ते मरुस्थलीकरण से बचाने की मुहिम के तहत किया गया है। इस सम्मेलन में अभी तक दुनिया भर के वैज्ञानिक अपने अपने मुल्कों  की समस्याएं और उनके निपटने को लेकर उठाए गए कदमों को साझा कर चुके हैं।
       इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया गंभीर जल संकट के दौर से गुजर रही है। जब हम मरुस्थलीकरण पर बात करते हैं तो जल संकट जैसी समस्या पर भी विचार करना पड़ता है। हमें जमीन को मरुस्थलीकरण से बचाने के लिए जल संरक्षण पर भी ध्यान देना होगा। हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि धरती के मरुस्थलीकरण से हमारा सतत विकास भी प्रभावित होता है। भारत की संस्कृहति में धरती, जल, वायु और पर्यावरण के संरक्षण की संकल्पना मौजूद है। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत में साल 2015 से साल 2017 के बीच वनीकरण में 0.8 मिलियन हेक्टेयर का इजाफा हुआ है। 
     प्रधानवमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्लास्टिक कचरे से प्रकृति को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए अपना संकल्प बताय़ा. प्रधानमंत्री ने कहा कि प्ला्स्टिक का कचरा भी मरुस्थलीकरण को बढ़ावा दे रहा है। प्लास्टिक का कचरा न केवल स्वास्य्य  का प्रभावित कर रहा है, यह धरती की उर्वरता के लिए भी समस्याएं पैदा कर रहा है। हमारी सरकार ने घोषणा की है कि वह आने वाले कुछ वर्षों के भीतर सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रचलन खत्मक कर देगी। हम पर्यावरण अनुकूल विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम प्लास्टिक के कचरे के निस्ताररण पर काम कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले वक्त में हम सिंगल यूज प्लारस्टिक को अलविदा कह देंगे। दुनिया के लिए भी सिंगल यूज प्लास्टिक को अलविदा कहने का समय आ गया है.
    कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि भारत ने बढ़ते मरुस्थेलीकरण से धरती को बचाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। पर्यावरण संरक्षण को लेकर भारत ने उल्ले खनीयकाम कर रहा है। यही वजह है कि दुनिया के 77 फीसदी बाघ केवल भारत में हैं। भारत ने बढ़ती ग्लोयबल वर्मिंग और प्रदूषण से निपटने के लिए टैक्स में छूट देकर ई-वाहनों को भी बढ़ावा दिया है। यदि इंसान के कर्मों से पर्यावरण परिवर्तन हुआ है तो उसी के सकारात्मक योगदान से ही उसमें सुधार भी लाया जाएगा। हमने टैक्स में छूट देकर इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रमोट करने का काम किया है। हमारी सरकार ने जल संरक्षण के लिए अलग से मंत्रालय का भी गठन किया है। इस बैठक में धरती पर जलवायु परिवर्तन, नष्ट होती जैव विविधता, मरुस्थलीकरण जैसे बढ़ते खतरों से निपटने को लेकर मंथन हो रहा है। 13 सितंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन से जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, मरुस्थलीकरण जैसी समस्याओं का सामना करने के लिए रोडमैप सामने आ सकता है। 
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