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  • लाचार किसानों पर जीएसटी ने बढ़ाया अधिभार: बुआई के सीजन में नहीं मिल पा रहा बीज और खाद
  • June 23, 2017
  • एक तरफ जहा देशभर के किसान लगातार घाटे का सौदा रही खेती को आर्थिक सहायता दिलाने के लिये आंदोलन कर रहे है वही नयी कर व्यवस्था ने किसानों का अर्थभार और बढ़ा दिया है। जीएसटी की नयी कर व्यवस्था में किसानों को उत्पादक के बजाये उपभोक्ता मान लिया गया है। ऐसे में जहा दूसरे उत्पादक अपने कच्चे माल पर दिये गये कर को इनपुट क्रेजिक्ट के तौर पर वापस हासिल कर सकेगे, वही किसानों के लिये ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होगी। इतना ही नहीं इस नयी कर व्यवस्था में खेती में काम आनेवाली अधिकांश चीजों खाद और कीटनाशक से लेकर ट्रैक्टर और दूसरे उपकरणों को न सिर्फ टैक्स के दायरे में रखा गया है बल्कि इनपर कर बढ़ा दिया गया है। खाद पर पहले जहा एक्सरसाइज शुल्क नहीं था और अधिकांश राज्यों में इसपर बैट में भी छूट थी। कुछ राज्य इसमें अधिकतम आठ फीसदी तक बैट लगाते थे। अब इसे बारह फीसदी के स्लैप में रख दिय गया है। इसी तरह कीटनाशक पर पहले 12 फीसदी एक्सरसाइज और 4-5

    फीसदी बैट था।

           जीएसटी आने के चलते खेती संबंधी जरूरी चीजे फर्टिलाइजर, मशीनरी, सिंचाई की सप्लाई शार्ट हो गयी है।          इसका वजह ये है कि ये सभी चीजे जीएसटी के दायरे में आने वाली है और कंपनिया उन्हे नये सिरे से            बाजार में बेचेगी जिससे चलते खरीफ फसलों की बुआई पर असर पड़ा है। 

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